Wednesday, October 23, 2024

चाँदनी की पाँच परतें

 


“चाँदनी की पाँच परतें,

हर परत अज्ञात है ।


एक जल में,

एक थल में,

एक नीलाकाश में ।

एक आँखों में तुम्हारे झिलमिलाती,

एक मेरे बन रहे विश्वास में ।

क्या कहूँ , कैसे कहूँ.....

कितनी जरा सी बात है ।

चाँदनी की पाँच परतें, हर परत अज्ञात है ।


एक जो मैं आज हूँ ,

एक जो मैं हो न पाया,

एक जो मैं हो न पाऊँगा कभी भी,

एक जो होने नहीं दोगी मुझे तुम,

एक जिसकी है हमारे बीच यह अभिशप्त छाया ।

क्यों सहूँ ,कब तक सहूँ....

कितना कठिन आघात है ।


चाँदनी की पाँच परतें, हर परत अज्ञात है ।”


- Sarveswar Dayal Saxena


https://www.youtube.com/watch?v=nyWWD7laFP4&t=9s

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